नारनौल और हरियाणा में हाथ कांपने और एसेंशियल ट्रेमर की समस्या समझाते हुए मरीज का चिकित्सकीय चित्र

विषय-सूची

नमस्ते। मैं डॉ. कविंद्र सिंह। पेशे से न्यूरोसर्जन हूं – यानी दिमाग, रीढ़ की हड्डी और नसों से जुड़ी समस्याओं का इलाज करने वाला डॉक्टर।

हरियाणा में — गुरुग्राम, फ़रीदाबाद, पानीपत, करनाल, रोहतक, हिसार जैसे शहरों से — मेरे पास हर हफ़्ते कुछ न कुछ मरीज़ ऐसे ज़रूर आते हैं, जो एक ही सवाल लेकर बैठते हैं –

“डॉक्टर साहब, मेरा हाथ कांपता है। ये क्या बीमारी है?”

कोई बुज़ुर्ग होते हैं, जिन्हें बच्चे परेशान होकर लाते हैं। कोई जवान लड़का-लड़की होते हैं, जिन्हें दूसरों के सामने हाथ कांपने पर शर्म आती है।

सच बात ये है – हाथ कांपना एक बहुत आम शिकायत है। ज़्यादातर बार इसकी वजह मामूली होती है। लेकिन कुछ मामलों में ये किसी बड़ी दिक्कत का शुरुआती इशारा भी हो सकता है।

इस लेख में मैं आपको सीधी, आसान भाषा में बताऊंगा – हाथ कांपने की वजह क्या-क्या हो सकती है, कब ये घबराने वाली बात नहीं, और कब डॉक्टर के पास जाना ज़रूरी है।

हाथ कांपना होता क्या है?

शरीर के किसी हिस्से का बार-बार, अपने आप हिलना – इसी को डॉक्टरी भाषा में कंपन (Tremor) कहते हैं। बोलचाल में इसे कई लोग कंपकंपी, हाथ हिलना या थरथराहट भी कहते हैं।

ये सबसे ज़्यादा हाथों में दिखता है। लेकिन सिर, आवाज़ या ठुड्डी में भी हो सकता है।

एक बात समझ लीजिए – कंपन खुद कोई बीमारी नहीं है। ये शरीर का एक संकेत है। शरीर आपको बता रहा है कि अंदर कुछ हो रहा है। वजह मामूली भी हो सकती है, और कभी-कभी गंभीर भी।

हाथ कांपने के सामान्य और मामूली कारण

पहले उन वजहों की बात करते हैं, जो ज़्यादातर घरों में देखी जाती हैं, और जिनमें घबराने की ज़रूरत नहीं होती।

नींद पूरी न होना – रात की नींद ठीक से न हो, तो अगले दिन हाथ हल्का कांप सकता है।

चाय-कॉफी ज़्यादा पीना – इनमें मौजूद कैफीन नसों को उत्तेजित करता है। ज़्यादा चाय-कॉफी पीने वालों में हल्का कंपन आम बात है।

तनाव और गुस्सा – मन बहुत परेशान हो, या डर लगे, तो शरीर में एक केमिकल निकलता है जो हाथ को हल्का कंपा देता है। ये हर इंसान के साथ कभी न कभी होता है।

ठंड लगना – सर्दी के मौसम में, या ठंडे पानी से नहाने के बाद हाथ कांपना बिलकुल सामान्य है।

भूखे रहना – लंबे समय तक खाली पेट रहने पर ब्लड शुगर गिर जाता है, और हाथ कांपने लगते हैं।

इन सब कारणों में एक बात एक जैसी है – आराम करते ही, खाना खाते ही, या नींद पूरी होते ही कंपन अपने आप ठीक हो जाता है।

Hand Tremors - When is It a Serious Condition

 हाथ कांपने के गंभीर कारण, जिनकी जांच ज़रूरी है

अब बात करते हैं उन कारणों की, जिनमें डॉक्टरी जांच ज़रूरी हो जाती है। डॉक्टरी भाषा में इन्हें मूवमेंट डिसऑर्डर भी कहा जाता है, यानी शरीर की हरकत से जुड़ी बीमारियां।

1. एसेंशियल ट्रेमर

ये हाथ कांपने की सबसे आम मेडिकल वजह है। बहुत से मरीज़ बताते हैं – चाय का कप उठाते ही, या अखबार का पन्ना पकड़ते ही, हाथ में हल्का कंपन शुरू हो जाता है। यानी कोई काम करते वक्त कंपन ज़्यादा दिखता है।

अक्सर ये परिवार में चलता है। अगर पिता या दादा को ये समस्या थी, तो आपको भी होने का खतरा ज़्यादा रहता है।

अच्छी बात ये है – एसेंशियल ट्रेमर धीरे-धीरे बढ़ता है, और सही इलाज से इसे काफी हद तक काबू में रखा जा सकता है।

2. पार्किंसन रोग

ये कंपन इसके उलट होता है – हाथ तब ज़्यादा कांपता है जब वो आराम की हालत में हो। जैसे हाथ गोद में रखकर बैठे हों, और वो अपने आप कांपने लगे। कोई काम पकड़ते ही (जैसे रोटी बेलना) कंपन कम हो जाता है।

पार्किंसन रोग में कंपन के साथ-साथ और लक्षण भी दिखते हैं – चलने में अकड़न, कदम छोटे-छोटे पड़ना, चेहरे के भाव कम हो जाना।

अगर सिर्फ कंपन है, तो घबराने की ज़रूरत नहीं। पार्किंसन का पक्का पता जांच के बाद ही चलता है।

3. थायरॉइड ग्रंथि की गड़बड़ी

गले में एक ग्रंथि होती है – थायरॉइड। जब ये ज़्यादा सक्रिय हो जाती है, तो शरीर में हलचल बढ़ जाती है। हाथ कांपना, दिल की धड़कन तेज़ होना, वज़न कम होना – ये सब साथ में दिख सकते हैं।

अच्छी बात ये है – खून की एक साधारण जांच से इसका पता चल जाता है, और दवा से ये पूरी तरह काबू में आ जाता है।

4. ब्लड शुगर का अचानक गिरना

जो लोग शुगर यानी डायबिटीज़ की दवा या इंसुलिन लेते हैं, अगर वो समय पर खाना नहीं खाते, तो ब्लड शुगर गिर सकता है। इसका पहला संकेत अक्सर हाथ कांपना और पसीना आना होता है।

5. कुछ दवाइयों का असर

कुछ दवाइयाँ – जैसे दमे की कुछ दवाइयाँ, स्टेरॉयड, या मानसिक बीमारी की कुछ दवाइयाँ – साइड इफ़ेक्ट के तौर पर कंपन ला सकती हैं। अगर हाल ही में कोई नई दवा शुरू की हो और हाथ कांपने लगे, तो अपने डॉक्टर को ज़रूर बताएं।

6. शराब की लत अचानक छोड़ने पर

जो लोग लंबे समय से बहुत ज़्यादा शराब पीते हैं, अगर वो अचानक पीना बंद कर दें, तो हाथ में तेज़ कंपन शुरू हो सकता है। ये एक गंभीर स्थिति है, जिसमें डॉक्टरी मदद ज़रूरी है।

7. दिमाग के संतुलन वाले हिस्से की समस्या

दिमाग में एक हिस्सा होता है जिसे सेरिबैलम कहते हैं – यही शरीर का संतुलन बनाता है। स्ट्रोक, चोट, या किसी और वजह से अगर इस हिस्से को नुकसान पहुंचे, तो एक खास तरह का कंपन होता है – जैसे गिलास को मुंह तक ले जाते-जाते हाथ ज़्यादा कांपने लगे।

ये वो कारण है, जहां न्यूरोसर्जन की जांच ज़रूरी हो जाती है, क्योंकि दिमाग की बनावट में गड़बड़ी हो सकती है।

सामान्य कंपन बनाम चिंताजनक कंपन – फ़र्क कैसे समझें?

मरीज़ अक्सर पूछते हैं – “डॉक्टर साहब, कैसे पता चले कि ये सामान्य है या गंभीर?”

यहां एक आसान तुलना है –

सामान्य कंपन चिंताजनक कंपन कभी-कभार होता है लगातार बना रहता है, बढ़ता जाता है थकान, चाय, तनाव के बाद आता है बिना किसी वजह अपने आप होता है आराम करते ही ठीक हो जाता है आराम करने पर भी बना रहता है दोनों हाथों में हल्का-हल्का एक हाथ से शुरू होकर बढ़ रहा है रोज़मर्रा के काम पर असर नहीं खाना खाने, लिखने, बटन लगाने में दिक्कत अकेले कंपन ही लक्षण है साथ में और लक्षण भी हैं

हाथ कांपना चेतावनी के संकेत – इन्हें बिलकुल नज़रअंदाज़ न करें

कुछ स्थितियों में देर करना सही नहीं। अगर हाथ कांपने के साथ ये भी दिखे, तो तुरंत नज़दीकी अस्पताल जाएं –

  • शरीर के एक तरफ अचानक कमज़ोरी आना
  • बोलने में दिक्कत होना, या शब्द न निकलना
  • चेहरा एक तरफ टेढ़ा हो जाना
  • अचानक धुंधला दिखना
  • होश कम होना या भ्रम की स्थिति

ये स्ट्रोक (लकवा) के संकेत भी हो सकते हैं। यहां एक मिनट की देरी भी नुकसान पहुंचा सकती है। ये इमरजेंसी है – अपॉइंटमेंट का इंतज़ार मत करें, सीधे अस्पताल जाएं।

इसके अलावा, अगर ये संकेत धीरे-धीरे दिखें, तो जल्द से जल्द डॉक्टर से मिलना ज़रूरी है –

  • कंपन महीनों से लगातार बढ़ रहा है
  • सिर्फ एक हाथ में शुरू हुआ है
  • चलने में अकड़न या लड़खड़ाहट भी है
  • हाथ कांपने की वजह से रोज़ के काम करने में दिक्कत महसूस हो रही है
  • 40 साल के बाद अचानक कंपन शुरू हुआ है

चिंताजनक कंपन – डॉक्टर से कब मिलें?

सीधी सी बात – अगर कंपन आपकी ज़िंदगी में दखल देने लगा है, तो इंतज़ार मत करिए।

अगर आप नारनौल, महेंद्रगढ़, अटेली, कनीना, रेवाड़ी, धारूहेड़ा या भिवाड़ी के आसपास रहते हैं और हाथ कांपना लगातार बढ़ रहा है, काम प्रभावित हो रहा है या साथ में दूसरे न्यूरोलॉजिकल लक्षण हैं, तो जांच में देरी न करें।

हर कंपन में न्यूरोसर्जरी की जरूरत नहीं होती।

मान लीजिए, चाय का कप उठाने में डर लगने लगे, या दस्तख़त करने में शर्म आने लगे, या घर वाले कहें कि “आजकल हाथ ज़्यादा कांपता है आपका” – ये सब संकेत हैं कि जांच का समय आ गया है।

शुरुआत में अपने फैमिली डॉक्टर से भी मिल सकते हैं। लेकिन अगर कंपन बढ़ रहा है, या साथ में चलने-बोलने की दिक्कत भी है, तो न्यूरोलॉजिस्ट (नसों के डॉक्टर) या न्यूरोसर्जन से मिलना बेहतर रहता है। हरियाणा में रहने वाले मरीज़ों के लिए अपने नज़दीकी न्यूरोसर्जन से समय पर जांच करवाना आसान भी है और फ़ायदेमंद भी।

जांच कैसे होती है?

घबराने की बात नहीं – ज़्यादातर जांच आसान और बिना दर्द वाली होती है।

बातचीत – डॉक्टर पहले पूछते हैं, कब से शुरू हुआ, कैसे बढ़ता है, परिवार में किसी को ऐसी समस्या रही है क्या।

शारीरिक जांच – हाथ को अलग-अलग स्थिति में रखकर देखा जाता है – आराम की हालत में, काम करते वक्त, और किसी चीज़ के पास ले जाते वक्त।

खून की जांच – थायरॉइड, ब्लड शुगर, लिवर और किडनी की स्थिति जानने के लिए।

MRI जांच – अगर दिमाग की बनावट में किसी गड़बड़ी का शक हो, तो दिमाग का MRI कराया जाता है। ये तस्वीर की तरह होता है, जिससे दिमाग के अंदर का हाल साफ़ दिखता है।

इन सब जांच के बाद ही सही वजह का पता चलता है। अंदाज़े से इलाज शुरू करना सही नहीं होता।

इलाज के विकल्प क्या हैं?

हाथ कांपने का इलाज पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि कंपन की वजह क्या निकली।

अगर वजह थायरॉइड या ब्लड शुगर है – उसकी दवा और सही खान-पान से कंपन अपने आप कम हो जाता है।

अगर वजह कोई दवा है – डॉक्टर की सलाह से दवा बदली या कम की जा सकती है। खुद से कोई दवा बंद न करें।

जीवनशैली में बदलाव – चाय-कॉफी कम करना, नींद पूरी लेना, तनाव कम करना – ये छोटे बदलाव भी काफी फ़र्क डालते हैं।

दवाइयां – एसेंशियल ट्रेमर और शुरुआती पार्किंसन में कुछ खास दवाइयां कंपन को काफी हद तक कम कर देती हैं। कौन सी दवा, कितनी मात्रा में – ये डॉक्टर की जांच के बाद ही तय होता है।

फिज़ियोथेरेपी – हाथ को स्थिर रखने की एक्सरसाइज़ भी मदद करती हैं, खासकर रोज़मर्रा के काम आसान बनाने में।

न्यूरोसर्जरी – सिर्फ चुनिंदा गंभीर मामलों में – जब कंपन बहुत तेज़ हो और दवाइयों से भी फ़ायदा न मिले, तब डीप ब्रेन स्टिमुलेशन (DBS) जैसे विकल्प पर विचार किया जाता है। इसमें दिमाग के एक खास हिस्से में एक बहुत छोटा डिवाइस लगाया जाता है, जो असामान्य सिग्नल को कंट्रोल करने में मदद करता है।

ये विकल्प हर मरीज़ के लिए नहीं है। सिर्फ पूरी जांच के बाद, जब बाकी सारे इलाज आज़मा लिए गए हों, तभी इस पर विचार किया जाता है।

अगला कदम क्या हो?

अगर आपके या आपके परिवार में किसी के हाथ कांपते हैं, तो तीन बातें याद रखिए –

पहली – घबराइए मत। ज़्यादातर मामलों में वजह मामूली होती है।

दूसरी – नज़रअंदाज़ भी मत करिए। कंपन कब से है, कैसे बढ़ रहा है, दिन में कब ज़्यादा होता है – इन बातों को नोट करना शुरू करें। इससे डॉक्टर को सही वजह पकड़ने में आसानी होती है।

तीसरी – सही समय पर सही डॉक्टर से मिलिए। अगर कंपन रोज़मर्रा की ज़िंदगी को प्रभावित कर रहा है, या ऊपर बताए गए चेतावनी के संकेत दिख रहे हैं, तो किसी न्यूरोलॉजिस्ट या न्यूरोसर्जन से मिलकर सही जांच ज़रूर कराएं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या हाथ कांपना हमेशा पार्किंसन की बीमारी होता है?

नहीं। हाथ कांपने के कई कारण होते हैं – थकान, तनाव, थायरॉइड, एसेंशियल ट्रेमर। पार्किंसन इनमें से सिर्फ एक वजह है, और वो भी जांच के बाद ही तय होती है।

क्या तनाव और चिंता से भी हाथ कांप सकते हैं?

हां, बिलकुल। तनाव में शरीर से निकलने वाला केमिकल हाथ को हल्का कंपा देता है। ये अस्थायी होता है, और तनाव कम होते ही ठीक हो जाता है।

क्या ये समस्या पूरी तरह ठीक हो सकती है?

ये वजह पर निर्भर करता है। थायरॉइड या ब्लड शुगर जैसी वजहों में कंपन दवा से पूरी तरह ठीक हो जाता है। एसेंशियल ट्रेमर या पार्किंसन जैसी स्थितियों में इलाज से कंपन को काफी हद तक काबू में रखा जा सकता है।

क्या बुज़ुर्गों में हाथ कांपना उम्र बढ़ने का सामान्य हिस्सा है?

हल्का-फुल्का कंपन उम्र के साथ आम है। लेकिन अगर कंपन तेज़ी से बढ़ रहा है, या रोज़मर्रा के काम में दिक्कत कर रहा है, तो इसे सिर्फ उम्र का असर मानकर नज़रअंदाज़ न करें।

क्या ये समस्या जवान लोगों या बच्चों में भी हो सकती है?

हां, हो सकती है, हालांकि ये कम देखा जाता है। एसेंशियल ट्रेमर परिवार में चलने की वजह से कम उम्र में भी शुरू हो सकता है। जवान लोगों में अचानक कंपन शुरू हो, तो जांच ज़रूर करानी चाहिए।

हाथ कांपने पर किस डॉक्टर को दिखाएं?

शुरुआत में फैमिली डॉक्टर से मिल सकते हैं। लेकिन कंपन बढ़ रहा हो, या साथ में कोई और लक्षण भी हो, तो न्यूरोलॉजिस्ट या न्यूरोसर्जन से जांच करवाना सही रहता है।

अगर हाथ कांपना बार-बार हो रहा है, तो इसे नजरअंदाज न करें। नारनौल में मुझसे मिलें, जांच कराकर सही कारण और इलाज की राह समझें।

डॉ. कविंद्र सिंह हरियाणा में कार्यरत एक न्यूरोसर्जन (ब्रेन एंड स्पाइन सर्जन) हैं, जो मूवमेंट डिसऑर्डर सहित दिमाग, रीढ़ की हड्डी और नसों से जुड़ी समस्याओं की जांच और इलाज करते हैं। अगर आपको या आपके किसी अपने को हाथ कांपने की समस्या है, और आप विशेषज्ञ की राय लेना चाहते हैं, तो अधिक जानकारी के लिए www.drkavindrasingh.com पर विज़िट करें।

चिकित्सकीय अस्वीकरण: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी लक्षण के आधार पर खुद से इलाज न करें। सही जांच और सलाह के लिए डॉक्टर से ज़रूर मिलें।

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