नारनौल हरियाणा में सर्वश्रेष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट, डॉ. काविंद्र सिंह मरीज को मेमोरी लॉस (याददाश्त कम होना), भूलने की आदत और ब्रेन हेल्थ (दिमागी स्वास्थ्य) के शुरुआती लक्षणों के बारे में समझाते हुए

क्या हर भूलने की आदत सामान्य है?

मैं, डॉ. कविंद्र सिंह, पिछले कई वर्षों से हरियाणा के मरीजों का इलाज करते हुए एक सवाल सबसे ज्यादा सुनता हूँ—

“डॉक्टर साहब, क्या मेरी याददाश्त कमजोर हो रही है या यह सिर्फ उम्र का असर है?” 

सच कहूँ तो हर भूलना बीमारी नहीं होता, लेकिन हर भूलने की आदत को नजरअंदाज करना भी सही नहीं है। कई लोग चाबी कहाँ रखी, किसी का नाम भूल जाना या मोबाइल खोजते रहना सामान्य मान लेते हैं। वहीं कुछ मामलों में यही शुरुआत किसी गंभीर ब्रेन प्रॉब्लम का संकेत भी हो सकती है।

पिछले कुछ समय में मेमोरी लॉस, भूलने की आदत, याददाश्त की समस्या के लक्षण, और मेमोरी लॉस के इलाज  जैसे विषयों को लेकर लोगों की जिज्ञासा लगातार बढ़ी है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि अब लोग दिमाग से जुड़ी समस्याओं के प्रति पहले से अधिक जागरूक हो रहे हैं।

सामान्य भूलना और बीमारी में फर्क कैसे समझें?

बढ़ती उम्र के साथ दिमाग की कार्यक्षमता में हल्का बदलाव आना सामान्य माना जाता है। लेकिन यदि कोई व्यक्ति रोजमर्रा के काम भूलने लगे, एक ही सवाल बार-बार पूछे, रास्ते भूल जाए या परिवार के लोगों को पहचानने में परेशानी महसूस करे, तो इसे सामान्य उम्र बढ़ने का हिस्सा मानना खतरनाक हो सकता है।

नारनौल का 66 वर्षीय एक व्यक्ति पहले बाजार का पूरा हिसाब खुद रखता था। अब वह हर दूसरे दिन दवा लेना भूल जाता है, एक ही बात बार-बार पूछता है और बैंक का काम भी अकेले नहीं कर पाता। ऐसी स्थिति में केवल “उम्र हो गई है” कहकर बात टालना उचित नहीं होगा। ऐसे मरीज को समय रहते हरियाणा के सर्वश्रेष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट  से जांच करवानी चाहिए ताकि असली कारण का पता चल सके।

किन संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?

यदि मेमोरी लॉस  के साथ व्यवहार में बदलाव, बोलने में कठिनाई, निर्णय लेने की क्षमता कम होना, बार-बार चीजें खोना, परिचित रास्ते भूल जाना या रोजमर्रा के काम करने में परेशानी शुरू हो जाए, तो यह गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्या का संकेत हो सकता है। कई बार विटामिन बी12 की कमी, थायरॉयड की समस्या, स्ट्रोक या अल्जाइमर रोग जैसी स्थितियाँ भी इसके पीछे हो सकती हैं।

अटेली की एक 58 वर्षीय महिला पहले पूरे परिवार का काम संभालती थीं। अब उन्हें गैस बंद करना, दवाइयाँ समय पर लेना और परिचित लोगों के नाम याद रखने में लगातार परेशानी होने लगी। ऐसे लक्षणों को केवल तनाव या उम्र का असर मानना सही नहीं होगा। सही समय पर जांच से कई कारणों का इलाज संभव होता है।

इसीलिए, हरियाणा के टॉप ब्रेन स्पेशलिस्ट (दिमाग के विशेषज्ञ) की हैसियत से, मैं हमेशा कहता हूँ कि शुरुआती जांच, मेमोरी लॉस का मूल्यांकन और समय पर न्यूरोलॉजिकल जांच भविष्य की गंभीर समस्याओं से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

किन लोगों में मेमोरी लॉस का खतरा अधिक होता है?

मेरे अनुभव में बढ़ती उम्र एक कारण जरूर है, लेकिन अकेला कारण नहीं। हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप), डायबिटीज (मधुमेह), स्ट्रोक, सिर में गंभीर चोट, लगातार तनाव, नींद की कमी, धूम्रपान, अत्यधिक शराब का सेवन और कुछ विटामिन की कमी भी मेमोरी लॉस का जोखिम बढ़ा सकती है। इसलिए मैं अपने हर मरीज को सिर्फ दवा पर ध्यान देने की सलाह नहीं, बल्कि पूरी जीवनशैली पर ध्यान देने की सलाह देता हूँ।

महेंद्रगढ़ के 62 वर्षीय एक व्यक्ति कई वर्षों से मधुमेह और उच्च रक्तचाप से जूझ रहे हैं। उन्हें नाम याद रखने और रोजमर्रा की छोटी बातें भूलने की शिकायत शुरू हुई। ऐसी स्थिति में केवल उम्र को दोष देने के बजाय न्यूरोलॉजिकल जांच आवश्यक हो जाती है।

याददाश्त कमजोर होने पर लोग सबसे बड़ी गलतियाँ क्या करते हैं?

एम्स दिल्ली में पढ़ाई के दिनों से लेकर पीजीआई चंडीगढ़ में न्यूरोसर्जरी की ट्रेनिंग तक, मैंने बार-बार एक बात देखी है—ज़्यादातर लोग भूलने की समस्या को तब तक गंभीरता से नहीं लेते, जब तक वह उनकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर असर डालना शुरू नहीं कर देती।

अक्सर देखता हूँ कि मेमोरी लॉस या भूलने की आदत शुरू होते ही कई लोग इंटरनेट पर घरेलू नुस्खे ढूंढ़ने लगते हैं या सोचते हैं कि “अभी उम्र ही तो बढ़ रही है, बाद में दिखा लेंगे।” यही सोच कई बार बीमारी को आगे बढ़ने का मौका दे देती है। हर भूलना अल्जाइमर रोग  नहीं होता, लेकिन हर बार इसे सामान्य मान लेना भी सही नहीं है।

नांगल चौधरी के एक 61 वर्षीय व्यक्ति को छह महीने से छोटी-छोटी बातें भूलने की शिकायत थी। परिवार ने इसे सामान्य उम्र का असर समझकर नजरअंदाज किया। जब जांच करवाई गई, तब पता चला कि समस्या का कारण ऐसा था जिसकी पहचान पहले हो जाती तो उपचार और भी प्रभावी हो सकता था। यह केवल एक उदाहरण है, लेकिन इससे एक महत्वपूर्ण सीख मिलती है—समय पर विशेषज्ञ से सलाह लेना हमेशा बेहतर रहता है।

मेरी सलाह हमेशा यही रहती है कि यदि याददाश्त की समस्या के लक्षण  लगातार बढ़ रहे हों, एक ही बात बार-बार भूल रहे हों, दवाइयाँ छूटने लगी हों या परिवार के सदस्य आपके व्यवहार में बदलाव महसूस कर रहे हों, तो स्वयं अनुमान लगाने के बजाय न्यूरोलॉजिस्ट से जांच कराएँ। सही समय पर सही जांच कई बार अनावश्यक चिंता भी दूर कर देती है और जरूरत पड़ने पर उपचार जल्दी शुरू करने का अवसर भी देती है।

कब तुरंत न्यूरोलॉजिस्टसे मिलना चाहिए?

  1. यदि भूलने की समस्या तेजी से बढ़ रही हो
  2. परिवार के लोगों को पहचानने में कठिनाई हो
  3. बोलने में परेशानी आने लगे
  4. रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगें 
  5. या भूलने के साथ हाथ-पैर में कमजोरी, चक्कर या दौरे जैसे लक्षण दिखाई दें

…..तो देर नहीं करनी चाहिए। ऐसी स्थिति में समय पर जांच भविष्य की जटिलताओं को कम करने में मदद कर सकती है।

कनीना की 55 वर्षीय एक महिला को पहले केवल चीजों को भूलने की शिकायत थी। कुछ महीनों बाद उन्हें शब्द बोलने में कठिनाई और रास्ता पहचानने में भी परेशानी होने लगी। ऐसे लक्षण तत्काल विशेषज्ञ परामर्श की मांग करते हैं।

जांच कैसे होती है?

कई लोग सोचते हैं कि मेमोरी लॉस का मतलब सीधे बड़ी बीमारी है, जबकि ऐसा हमेशा नहीं होता। सबसे पहले विस्तृत मेडिकल हिस्ट्री, न्यूरोलॉजिकल परीक्षण और आवश्यक होने पर खून की जांच की जाती है। जरूरत पड़ने पर एमआरआई ब्रेन, सीटी स्कैन , संज्ञानात्मक मूल्यांकन और अन्य जांचों की सलाह दी जा सकती है। सही कारण जानने के बाद ही उचित उपचार तय किया जाता है।

नीमराना से आने वाले एक व्यक्ति को भूलने की शिकायत थी, लेकिन जांच में विटामिन की कमी सामने आई। उचित उपचार और जीवनशैली में सुधार के बाद उनकी स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ। हर मरीज का कारण अलग हो सकता है, इसलिए स्वयं निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।

क्या मेमोरी लॉस का इलाज संभव है?

हर मरीज का उपचार उसके कारण पर निर्भर करता है। कुछ मामलों में दवाओं, पोषण सुधार, मानसिक व्यायाम, नियमित शारीरिक गतिविधि, अच्छी नींद और अन्य चिकित्सकीय उपचार से काफी लाभ मिलता है। यदि समस्या किसी न्यूरोलॉजिकल बीमारी से जुड़ी हो, तो समय पर उपचार उसकी प्रगति को धीमा करने और जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

धारूहेड़ा के एक 60 वर्षीय व्यक्ति समय रहते जांच के लिए आए। शुरुआती चरण में समस्या पहचान ली गई और उपचार शुरू होने से वे लंबे समय तक अपनी दैनिक गतिविधियाँ स्वतंत्र रूप से कर पाए। यही कारण है कि मैं हमेशा जल्दी जांच कराने की सलाह देता हूँ।

घर पर खुद करें यह छोटा-सा मेमोरी चेक (याददाश्त की जांच)

यदि आपको अपने किसी परिजन की याददाश्त को लेकर चिंता है, तो खुद से ये सवाल पूछिए—

  • एक ही बात बार-बार पूछते हैं?
  • जरूरी सामान बार-बार खो देते हैं?
  • दवाइयाँ लेना भूल जाते हैं?
  • परिचित रास्तों पर भी भ्रमित हो जाते हैं?
  • बातचीत के दौरान सही शब्द याद नहीं आते?
  • परिवार के सदस्य उनके व्यवहार में बदलाव महसूस कर रहे हैं?

यदि इनमें से कई सवालों का जवाब “हाँ” है, तो इसे नजरअंदाज न करें। समय पर विशेषज्ञ जांच आगे की सही योजना बनाने में मदद कर सकती है।

भारत में सर्वश्रेष्ठ न्यूरोसर्जन
भारत में सर्वश्रेष्ठ न्यूरोसर्जन

यदि आप नारनौल या आसपास रहते हैं, तो इंतजार क्यों?

मैं रोज ऐसे परिवारों से मिलता हूँ जो सोचते हैं कि कुछ महीनों बाद दिखा देंगे। लेकिन दिमाग से जुड़ी कई समस्याओं में समय बहुत महत्वपूर्ण होता है। यदि आप नारनौल, महेंद्रगढ़, अटेली, कनीना, नांगल चौधरी, नीमराना, धारूहेड़ा, भिवाड़ी, रेवाड़ी या आसपास के क्षेत्र से हैं और घर में किसी की मेमोरी लॉस, भूलने की आदत, बार-बार चीजें भूलने या व्यवहार में बदलाव की समस्या बढ़ रही है, तो विशेषज्ञ सलाह लेने में देरी न करें। सही समय पर जांच से कारण समझने और उचित उपचार की दिशा तय करने का अवसर मिलता है।

आपका दिमाग आपकी सबसे बड़ी पूंजी है—इसे कल पर मत टालिए। 📞 अपॉइंटमेंट के लिए अभी कॉल करें

लेखक के बारे में

डॉ. कविंद्र सिंह AIIMS नई दिल्ली से प्रशिक्षित न्यूरोसर्जन एवं स्पाइन विशेषज्ञ हैं। उन्होंने AIIMS नई दिल्ली और PGIMER चंडीगढ़ जैसे देश के प्रतिष्ठित संस्थानों से उन्नत प्रशिक्षण प्राप्त किया है। वे ब्रेन ट्यूमर, स्ट्रोक, सिर की चोट, रीढ़ (स्पाइन) और नसों से जुड़ी जटिल बीमारियों के सटीक निदान एवं आधुनिक उपचार में विशेषज्ञता रखते हैं। वर्तमान में वे रेनबो मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नारनौल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और मरीजों को वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित, सुरक्षित तथा विश्वसनीय न्यूरोसर्जिकल उपचार उपलब्ध कराने के लिए समर्पित हैं।

हरियाणा और राजस्थान के मरीजों के लिए विशेषज्ञ न्यूरोसर्जरी सेवाएं:
कविंद्र सिंह — रेनबो मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नारनौल में उन्नत ब्रेन, स्पाइन और नसों से जुड़ी बीमारियों का विशेषज्ञ उपचार प्रदान करते हैं। उनके पास नारनौल, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, रोहतक, भिवानी, चरखी दादरी, झज्जर, धारूहेड़ा, बावल, अटेली, कनीना, कोसली, लोहारू, अलवर, बहरोड़, कोटपूतली, नीमराना, पिलानी, चिड़ावा, सिंघाना और खेतड़ी सहित हरियाणा व राजस्थान के अनेक क्षेत्रों से मरीज उपचार के लिए आते हैं। उनका उद्देश्य है कि लोगों को आधुनिक और विश्वसनीय न्यूरोसर्जिकल उपचार अपने क्षेत्र के नज़दीक ही उपलब्ध हो, ताकि उन्हें सामान्य जांच, परामर्श और उपचार के लिए दूर-दराज़ के महानगरों का रुख न करना पड़े।

चिकित्सकीय अस्वीकरण: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी लक्षण के आधार पर खुद से इलाज न करें। सही जांच और सलाह के लिए डॉक्टर से ज़रूर मिलें।

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